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ओउम संग सत्संग की पहिचान

Posted On: 31 Jan, 2017 में

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कभी कभी मेरा तन कहीं और मन कहीं,
पर मैं दोस्तों को भूलता नहीं !
मैं तो अपनी ही कह रहा हूँ,
आप भूल मत जाना कहीं !
कल कुदरत ने करिश्मा दिखलाया,
मेरी समझ में कुछ नहीं आया,
आज फिर लाफ्टर क्लब ने
ओउम का मतलब बतलाया !
ओउम से जुड़ते हैं लोग,
ओउम से शुरू होता है योग,
ओउम ओउम से शांति मिलती,
बागों में कलियाँ हैं खिलती,
ओउम ही है स्वर्ग की सीढी,
ओउम से तार जाती पीढी !!

आओ ज़रा संग संग होलें,
दिल दिमाग के परदे खोलें,
दिल ही दिल आपस में मिलेंगे,
अंतर बगिया में फूल खिलेंगे,
संगती अनार बन निकलेगा,
मन मिठास ये जिह्वा लेगा !
पर संगति का हो अच्छा जोड़,
कोई न सके जिसको तोड़,
सन्त समागम सदा निराला,
पहननी होगी सत-रंगी माला,
तब होगी सत्संगी पहिचान,
कितना मिला मान सम्मान !
शुभ कामनाओं के साथ हरेन्द्र

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5 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Shobha के द्वारा
February 6, 2017

श्री रावत जी अति प्रभाव शाली ढंग से आपने अपनी बात रखी है ओम का महत्व अपरिमित है सद्गुरु जी की प्रतिक्रिया पढ़ कर आपके भावों को समझने में आसानी हुई अति सुंदर विचार

    harirawat के द्वारा
    February 11, 2017

    शोभाजी नमस्कार, सकारात्मक टिप्पणी के लिए धन्यवाद !

sadguruji के द्वारा
February 4, 2017

आदरणीय हरेन्द्र रावत जी ! सुप्रभात और सादर हरिस्मरण ! लिक से अलग हटकर आध्यात्मिक स्पर्श के साथ एक बहुत सुन्दर कविता के लिए आपका बहुत बहुत अभिनन्दन और हार्दिक बधाई ! सत्यपथ तो आदमी के भीतर ही है, किन्तु अच्छी संगति हमारे विश्वास को और पुष्ट करती है, जबकि कुसंगति हमें सत्यपथ से विचलित करती है ! मेरे विचार से स्थित प्रज्ञ की अवस्था आने तक अर्थात सुदृढ़ आध्यात्मिक अनुभव होने तक सत्संगति और सेवा दोनों ही आवश्यक है ! ये अहंकार और नाना प्रकार के विकार रूपी बिमारी से बचा हमें आध्यात्मिक पथ पर आगे बढ़ाती हैं ! सुदृढ़ आध्यात्मिक अनुभव ही व्यक्ति को गिरने से बचा सकता है ! आध्यात्म का मार्ग संसार में यहाँ वहां बिखरी हुईं शरीरधारी आत्माओं को आपस में मिलाता है और उन्हें अपने वास्तविक रूप की अनुभूति प्राप्त कर परम पिता परमात्मा के निकट जाने को प्रेरित करता है, ताकि अपने शास्वत धाम पहुँच जीवन-मरण के बंधन से मुक्ति मिल सके ! एक बहुत अच्छी चर्चा के लिए हार्दिक आभार !

    harirawat के द्वारा
    February 4, 2017

    सतगुरु जी सबसे पहले आप जैसे सत्पुरुषों का मेरे ब्लॉग पर आना ही मेरे लिए बड़े शौभाग्य की बात है ! आपने मेरे भावों को पहचान कर मेरा हौसला अफजाई किया है, ह्रदय की गहराइयों से धन्यवाद देता हूँ !शुभकामनाओं के साथ – हरेन्द्र

harirawat के द्वारा
January 31, 2017

किसी सजन ने मुझे पूछा की संगत से कया लाभ हैं ? क्या ये सत्य पथ दिखाता है, गिरते हुए को संभालता है, बिछुड़े हुओं को मिलाता है ? मैंने इसका जबाब देने की कोशिश मात्र की है, कृपया आप अपने सुझाव दीजिए !!


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