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सैनिकों की कुर्वानी नेता ऐक्टरों की जवानी

Posted On: 10 Feb, 2017 social issues में

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देश का नागरिक जब भी फौजी वर्दी पहन लेता है, चाहे वर्दी सैनिक अधिकारी की हो चाहे कनिष्क अधिकारी की या फिर सैनिक की हो,
वह अपने माँ, बाप, पत्नी बच्चों की चिंता न करते हुए, केवल और केवल भारत देश का रक्षा कर्मचारी बन जाता है ! ये सैनिक अपने परिवार से दूर
देश की सुरक्षा के लिए चाहे रेगिस्थानी रेतीले टीले हों या फिर काश्मीर, अरुणाचल, उत्तराखंड – हिमांचल की हिमाच्छादित चोटियां हों, ये देश की सीमाओं
पर २४ घंटे दुश्मन की हर हरकत पर दृष्टि रखे हुए होते हैं ! देश में गणतंत्र मनाने का जोश जोर शोरों पर था ! गणतंत्र दिवस के एक ही दिन पहले यानी २५
जनवरी की रात की तो बात है ! सारे लोग हथियारों से लैश थे, वर्फिली चोटी पर, कैम्पों में जहां का टेम्प्रेचर हमेशा जीरो डिग्री रहता है, साथ ही कंपकंपाने वाली बर्फीली हवाओं का जोर ! कुछ ड्यूटी पर तैनात कुछ स्नोई टैंटों में विश्राम कर रहे थे ! अगर दुश्मन का अटैक होता तो हथियार गोला बारूद इस्तेमाल किया जाता, लेकिन ये तो कुदरत का कहर था !
अचानक जोर का धमाका हुआ और वर्फ़ की एक बड़ी भारी चट्टान खिसकती हुई कैम्प को दफ़न करती हुई निकल गयी ! कैम्प में एक मेजर रैंक का अधिकारी
और २० जवान थे, सारे वर्फीले टीले में दफ़न होगये, १५ तो सांस रुकने के कारण भगवान् को उसी समय प्यारे होगये थे, उनकी मृतक देह को बड़ी मुश्किल से उन वर्फिली चट्टानों से बाहर निकाला गया ! पांच सैनिकों को किसी तरह वर्फीली ढेरों से ज़िंदा ही बाहर निकाला गया था, वे काफी जख्मी हो चुके थे, हेलीकॉफ़्टरों से उन्हें सैनिक अस्पतालों तक भी पहुंचाया गया लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका ! उन्होंने भी अपने को बचाने की कोशिश में लगे हुए साथियों को अपनी अंतिम “जयहिंद” कही और सदाके लिए आँखें मूद ली !
अगले दिन सारा देश गणतंत्र दिवस के रंग में रंगा हुआ था, राजपथ विजयचौक पर सैना के तीनों अंगों के सैनिकों द्वारा भारत के महामहीम राष्ट्रपति जी को सलामी दे रहे थे, और
उधर देश पर कुर्वान हुए जवानों के परिवारों में अन्धेरा और सन्नाटा छाया हुआ था, करुण क्रंदन चीख पुकार से उनके गाँवों का माहौल शोकायुक्त, ह्रदय विदारक दृश्य उत्पन कर रहा था ! पिछली बार जब वे छुट्टी आएं होंगे और वापिस अपनी ड्यूटी पर जाते हुए अपने नन्ने नन्ने बच्चों को गोद में लेकर
कहा होगा, “बच्चो अब मैं अगली बार छुट्टी आऊंगा तो तुम्हारे लिए सुन्दर सुन्दर खिलौने, चॉकलेट और नए डिजायन की वर्दी लेकर आऊंगा” ! ऐसे ही ही वादे उनहोंने अपने बूढ़े माँ बाप से भी किया होगा, “अगली बार मैं आप के लिए सर्दी से बचने के लिए गर्म कपडे लाऊंगा तथा दवाइयां भी जरूर लाऊंगा”, लेकिन उन परिवारो के उनके लाडला व बच्चों के पापा तो नहीं आये उनका निर्जीव शरीर तिरंगे से लिपटा हुआ आया ! यह देखकर तो माँ बाप और पत्नी तो बेहोश होगये होंगे ! कहते हैं, भगवान् जो करता है अच्छा ही करता है, लेकिन इस विशेष “सैनिकों की कुर्वानी” में न जाने कौन सी अच्छाई छिपी हुई होगी, केवल वही नीली छतरी वाला ही जानता है ! उन स्वर्गवासी जवानों के बटालियन ही नहीं बल्कि पूरे डिवीजन के तथा उनकी पूरी रेजिमेंट के जनरल से लेकर जवानों ने अश्रुओं से भरे हुए चक्षुओं से उन्हें भाव भीनी विदाई दी होगी, तथा उनके परिवार वालों को इस असामायिक क्षति पर अपनी संवेदना के शब्द भी भेजे होंगे ! देश के प्रधान मंत्री जी ने भी शोकाकुल परिवार वालों को अपनी संवेदना सन्देश जरूर भेजा होगा ! लेकिन दुःख तो तब होता है की एक नेता जिसने अपने उदयकाल से लेकर सांयकाल तक अपने कुर्सी के खातिर कितने कुकर्म किये होंगे, कितने गरीबों की खून पशीने की कमाई पर हाथ साफ़ किया होगा, रिश्वत खोरी, काला बाजारी, भ्रष्टाचारी का रिकार्ड तोडा होगा, पर जब वो धरती को छोड़कर मजबूर होकर जाता है पता नहीं, जहन्नूम या नरक में, न चाहते हुए भी जनता उसका चौखटा देखने के लिए उमड़ पड़ती है ! पड़ताड़ित होने वाले मन ही मन शुक्र मनाते होंगे, गाली भी देते होंगे पर उसके शव के साथ साथ घाट तक जरूर जाते हैं ! उनमें गाँव मोहल्ले, रिश्तेदार, पार्टी के अलावा विपक्षी नेता, राज नेता, झोलाछाप नेता, सड़कछाप नेता, मतलब परस्त आयाराम गया राम नेता, सभी धर्मों और जाति विरादरी के लोग तथा फ़िल्मी दुनिया के अलावा शासक, प्रशासक, उद्योग घरानों के लोग भी सामिल होते हैं ! सैनिकों की अपेक्षा उन्हें ज्यादा इज्जत दी जाती है, उन्हें अमर बना दिया जाता है ! अपनी कुर्सी के खातिर ये अपने सगे भाई की भी ह्त्या तक करवा देते हैं ! आजकल उत्तर प्रदेश के अलावा चार प्रदेशों में विधान सभा के चुनाव होने जा रहे हैं, आरएलडी के सिटींग विधायक
ने अपनी कुर्सी को बचाने के खातिर अपने भाई की ही ह्त्या करवा दी ! ये है आजके राजनेताओं का चरित्र ! और लीजिए अभिनेताओं की बात करें, वे बेफिक्र होकर फिल्म तैयार करते हैं, उन्हें पता है की मुम्बई जैसे फिल्मी नगरों में, नक्षली, मावोवादी तथा पाकिस्तान द्वारा पालित आतंकी मार काट लूट खसोट करते हैं और कभी कभी बड़ी संख्या में खून खराबा भी करते हैं, अपने को बचाने के लिए वे दाऊद जैसे देश द्रोही आतंकियों को बड़ी रकम पकड़ा कर निर्विघ्न तौर पर अपनी फिल्म पूरी कर लेते हैं ! राजस्थान में कुछ सालों पहले फ़िल्मी अभिनेता सलमानखान ने एक काला हिरण मार दिया था ! वहां हिरण या किसी भी जंगली जानवर को मारने पर शक्त से शक्त सजा का प्रावधान है, लेकिन सलमान खान को कोर्ट ने वाइज्जत रिहा कर दिया था ! शायद पुलिस सलमानखान के रुतवे से प्रभावित होकर कोर्ट में सही दस्तावेज व् गवावों को पेश नहीं कर पाई होगी ! इनकी एक ही फिल्म करोड़ों रूपये कमा लेते हैं, और राजनीतिज्ञों की तरह सदा जवान रहते हैं ! ‘जवान तेरी यही कहानी, तन मिट जाय न हो देश की सुरक्षा की हानी’! जवान कुर्वान होते हैं, और नेता ऐक्टर जवान होते हैं !
आज के जवानों में देश के प्रति प्रेम भावना की कमी नहीं है, वे पाकिस्तान जैसे आतंकी दुश्मनों से अपनी सीमाओं की रक्षा करते हुए, उन्हें चुन चुन कर मौत के घाट
उतारने के लिए हर समय तैयार रहते हैं ! पर सैनिक बनते हैं केवल किसानों और सैनिकों के बच्चे ! स्वर्गीय प्रधान मंत्री श्री लाल बहादुर शास्त्री जी ने १९६५ इंडो-पाक वॉर में नारा दिया था “जय जवान जय किसान” ! सैना में अनुशासन सिखाया जाता है, कठीन मेहनत, शारीरिक व्यायाम करके स्वास्थ्य के प्रति जागरूक होने की शिक्षा दी जाती है ! पहाड़ों बर्फीली चट्टानों में रहने के लिए इस शरीर को तैयार करना, आपसी भाई चारा जो सैना में सीखा जा सकता है वह सिविस सर्विस में नहीं सीखा जा सकता है, क्यों की यहां रेजिमेंट की एक यूनिट में भी भारत के सारे प्रांतों के, पूर्व- पश्चिम, उत्तर- दक्षिण के हर एज ग्रुप के लोग साथ साथ अपने ट्रेड का काम करते हैं, साथ ड्यूटी देते हैं, खान पान साथ साथ होता है, साथ ही मिलकर लड़ाई के दौरान दुर्गम से दुर्गम घाटियों में दुश्मन से लड़ते हुए, जख्मी होने पर एक दूसरे की मदद करते हैं ! वे राजनीतिक पार्टियों की तरह आपस में नहीं लड़ते, जैसे अभी हाल ही में यूपी में एसपी और बीएसपी चुनावों के दौरान आपस में लड़ पड़े और दो लोग मारे गए, ये रक्त इन्होंने देश के लिए आतंकवादियों या दुश्मन पाकिस्तानी सैनिकों से लड़ते हुए बहाया होता तो उनकी जय जैकारा होती ! इस लिए तमाम देश वासियों को चाहे वे राजनीति से जुड़े हुए हों चाहे शासक प्रशासक की कुर्सी पर बैठने की कोशिश कर रहे हों, या फिर उद्योग घरानों के सुकुमार राजकुमार हों, या फिर फ़िल्मी दुनिया में किस्मत आजमा रहे हों ! ये लोग पैसा कमा सकते हैं, अपना रईसी व्यक्तित्व को चमका सकते हैं, लेकिन अनुशासन, कठिन प्रस्थितियों से अपना कैसे बचाव किया जा सकता है, देश के प्रति वफादारी का जज्वा कैसे पैदा किया जाता है, सैनिक के प्रति सच्चे मन से कैसे आदर और इज्जत का भाव पैदा किया जा सकता है, ये सब कुछ सैना में पांच साल की ट्रेनिंग लेने से ही सीखा जा सकता है !
कल मैं भी सैनिक था आज भूत पूर्व सैनिक हूँ,
६५ और ७१ की लड़ाइयां लड़ी हैं, याद करता है पाक जो उन पर पडी हैं,
मिजो राम के विद्रोहियों को प्रेम और शांति का पाठ पढ़ाया,
उनके दुःख सुख में तीन साल तक हाथ बंटाया,
जम्मू काश्मीर,कारगिल और लेह लद्दाक की चोटियों में,
भारत माता की सेवा में सम्पूर्ण जवानी बिताया !
मोदी जी ने हमारी मांगों पर विचार किया
और तमाम भूत पूर्व सैनिकों ने वन रैंक वन पेंशन का लाभ उठाया !
इसलिए देश के जवानों को ये मेरा सन्देश,
देश की सुरक्षा में जुट जाओ, महान है मेरा देश !
जय हिन्द जय भारत – हरेन्द्र

डिग्री से भी नीचे था !

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1 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

harirawat के द्वारा
February 12, 2017

सैनिकों के प्रति अपना आदर और स्नेह का भाव शायद सारे देश वासियों को जरूर होगा, यह मुझे पका यकीन है ! जागरणजंक्शन के पाठकों से मेरा अनुरोध है की वे सैनिकों के प्रति सम्मान प्रकट करने के लिए इस ब्लॉग को जरूर पढ़ें और अपनी प्रतिक्रया दें ! जय जवान जय किसान !


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