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ख़ुशी और गम

Posted On: 25 Apr, 2017 में

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जहां ख़ुशी वहां गम भी होता है,
फिर हे मानव क्यों गम पर रोता है,
कर इस दिल को मजबूत इतना,
की खुद गम आकर तुझ से पूछे ,
‘भैया डरता हूँ मैं तुझसे
बता मेरी जगह कहाँ है’ !
जब खुशियों की वरसात बरसती है,
तुम खुशी ख़ुशी नहा लेते हो,
बसंती खुशबू में भंवरा बन,
गुन गुन की धुन बजाते हो !
फिर गम से क्यों डरते हो,
बेकार में नफरत करते हो,
ये गम ही स्ट्रांग बनाएगा,
खुशियों का मोल बताएगा ! हरेंद्र

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1 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

harirawat के द्वारा
April 25, 2017

केवल अपनी राय से मुझे अपनी कविता को सुधारने का मौक़ा दें ! धन्यवाद ! हरेंद्र


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