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आओ पढ़े अजब गजब की खबरें

Posted On: 12 Sep, 2017 में

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चन्द्रसिंह गढ़वाली
विश्व युद्ध के दौरान अंग्रेजों ने बड़ी मात्रा में भारतीय सैनिकों को अपनी सैना में भर्ती किया था , उन्हें ससम्मान सिपाही का रैंक दिया ! ऊँचे खान दान /रईसों/राज परिवार के लोगों को कमीशन देकर सैनिक अधिकारी बनाया ! भारतीय सैनिकों ने अंग्रेजी राज में भी प्रथम और द्वीतीय विश्व युद्धों में अपनी सूझ बुझ, काबिलियल और वीरता का सबूत दिया, साथ ही उच्चस्तर के लीडरशिप का जलवा दिखाकर केवल अपना और देश का नाम ही नहीं उज्ज्वल किया बल्कि विश्व स्तर पर भारत को प्रमुख श्रेणी में ला खड़ा किया ! देश में आजादी का बिगुल बज चुका था, नेताजी सुभाष चंद्र बोष, गांधी जी, लालालाजपतराय, बालगंगाधर तिलक, चंद्रशेखर आजाद, भगतसिंह जैसे नेता अंग्रेजों की आँखों का काँटा बन चुके थे ! उधर सैनिक छावनियों में भी विद्रोह की आग जल चुकी थी जो आने वाले समय में भयंकर ज्वाला में प्रवर्तित होने की !चेतावनी दे रही थी !१९३० ईं० में पेशावर काण्ड में स्वर्गीय श्री चंद्रसिंह गढ़वाली ने जो अंग्रेजी सैना के एक कंपनी के हवलदार मेजर थे और आगे के प्रोमोशन के लिए तैयार बैठे थे, उन्हें अंग्रेजी कमांडर ने निशस्त्र स्वतंत्रता आंदोलनकारियों पर गोली चलाने का आदेश दिया था, जिसे उन्होंने मानने से इनकार कर दिया था ! उनके खिलाफ सैनिक कोर्ट में मुकदमा चला और उन्हें आजन्म कारागार में भेज दिया ! १५ अगस्त १९४७ के बाद ही वे जेल से छूट पाए थे ! काफी दिनों तक वे अनजान बने रहे और आजीविका के लिए निम्न स्तर के काम भी उन्हें करने पड़े ! स्वतंत्र सैनानी देश भक्त की नजर उन पर पड़ी और तब कहीं जाकर उन्हें एक पहचान मिली ! आज वे हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उत्तराखंड के स्वतंत्र सैनानियों के बीच अपना स्थान सुरक्षित करके स्वर्गवासी हुए ! ऐसे बहादुर सैनिक और स्वतंत्र सैनानी को नमन ! जय हिन्द, जय भारत !

अजयजी, फेस बुक पर हमारी सारे सैनिकों को दोस्ती को पूरे ७ साल होगये,
आप जैसे प्रश्नचित व्यक्तित्व के धनि जिनके चहरे पर हर समय एक कुदरती
मुस्कान खेलती रहती है, महफ़िल में खूल कर
हंसने वाले इंसान से दोस्ती कर मैं भी हंसने हंसाने लगा हूँ ! दिल से इस
दोस्ती को रंगीन बनाता हूँ ! शुभ कामनाओं के साथ हरेंद्र रावत

अरे तू फरिस्ता तो नहीं था ?
आज सुबह सुबह टाइम्स आफ इंडिया पेज १८ पर खबर पढ़ी, एक १४ महीने का
सोमनाथ शाह (सूरत) जो स्वयं तो इस संसार से विदा होगया लेकिन अपने ह्रदय और
किडनी को दान देकर, एक ३ साल की लड़की (दिल) और १५ साल के लड़के को
(किडनी) जीवन दान दे गया ! फरिश्ता कौन होता है, ये ढोंग करने वाले फ़रिश्ते नहीं होते,
ढोंगी साधू सन्यासी जेलों की काल कोठरी में जाते हैं और फ़रिश्ते कम उम्र में ही जन
कल्याण करके चले जाते हैं, वे सीधे स्वर्ग में स्थान पाते हैं और साक्षात ब्रह्म में समा जाते हैं !
लड़की बेचारी ६ महीने से इन्तजार कर रही थी, यमराज दरवाजे पर खड़ा था, .करिश्मा हुआ
एक दीपक बुझा तो दूसरे को रौशनी मिल गयी ! मैं सोमनाथ शाह के माता-पिता को साष्टांग
प्रणाम करता हूँ जिनके घर फरिश्ता पैदा हुआ !

एक सैनिक की जम्मू काश्मीर में आतंकवादी की गोली सर में लगने से उसका ब्रेन डेड होगया,
उसके फौजी भाई ने उसके सारे ऑर्गन्स दान कर के फौजी भाई को अमर कर दिया !

अरे लालू जी आपने ये क्या किया ? लपेट लिया अपने कुकर्मों में अपनी बिटिया रानी
मीशा भारती और दामाद शैलेश कुमार को भी !
माँ-बाप अपने बेटी दामाद को दहेज़ देते हैं अपनी ईमानदारी कमाई से, न की सत्ता के शिखर
पर बैठकर अपने राज्य के गरीबों का रक्त चूस कर, उनकी जमीन सरकारी बताकर अपने
परिवार के नाम रजिस्टर्ड करवा कर ! बिजवासन दिल्ली का फ़ार्म हाउस बेटी दामाद को दहेज़ कर दिया !
रजिस्ट्री करने के लिए एक फर्जी कंपनी खुलवाई, उस कंपनी के नाम से फ़ार्म हाउस की रजिस्ट्री करवाई,
समय बदला बिहार ही नहीं कहीं भी पापा के नाम का सिक्का बैरंग होने के कारण कहीं नहीं चल पाया और
ईडी स्टाफ का छापा पड़ा, सारे पेपर फर्जी मिले, ईडी ने फॉर्म हॉउस सरकारी बट्टे खाते में डाल दिया,
अलावा बेटे के नाम पर ४० करोड़ की दिल्ली वाली सम्पति भी सरकारी सम्पति बन गयी ! !
वैसे लालू जी अब अपने परिवार के साथ मोदीजी और नीतीश कुमार जी को जितना भी बुरा भला बोलें,
उनके भ्रष्टाचार उनके मुंह, आँख, कान और नाक से निकल रहे हैं ! एक ईमानदारी लालू जी ने जरूर
की कि, रेलवे मंत्री होने के वावजूद “बिहार एक्सप्रेस” अपने परिवार के नाम नहीं लिख वाई !

बच्चे का नाम प्रड्यूमन ठाकुर ७ साल का -
हत्यारे का नाम अशोक कुमार -स्कूल बस का कंडक्टर
-उसके भी दो नन्ने नन्ने बचे हैं !
स्कूल रयान अंतर्राष्ट्रीय गुडगाँव ! दुर्घटना – 0८/०९/२०१७ शुक्रवार
स्कूल में इतना बड़ा चाक़ू कैसे आया, नन्ने नन्ने बच्चों की
हिफाजत का कोइ इंतजाम नहीं ! अरे कमीनो, भारी भरकम फीस
बच्चों से लेकर उन्हें काल के मुंह में डाल रहे हो, जरा सोचो तुम्हारे भी
नन्ने प्यारे बच्चों के साथ ऐसे जघन्य शैतानियत जैसे हादसा होंगे, तुम्हे
कैसे लगेगा ! स्कूल मैनेजमेंट सहित कला टीचर व् सम्बंधित कर्मचारियों को
आजन्म जेल में डाल दिया जाना चाहिए, ताकि उस बच्चे की आत्मा को स्वर्ग
में शान्ति मिल जाय !

हे, नर रूपी शैतान, हत्यारा,
क्यों तैने बालक को मारा,
तू नर नहीं है पिच्चास,
कर दिया अपने कुल का नाश,
हे, जल्लाद तेरे भी तो बच्चे हैं,
नादान अकल के कच्चे हैं,
तुझे उनकी याद नहीं आई,
जब मासूम के गले छुरी चलाई ?
अब मरेगा सुवर की मौत,
दुष्कर्म किये हैं तैने बहुत !
ऊपर टाँगे, नीचे सिर,
ज्वाला भड़केगी नीचे फिर,
जान अटकेगी दोनों के बीच,
यही सच है सुनले नीच !

बच्चों के बारे में कैसे कैसे लेख समाचार पत्रों में छपते हैं,
फिर भी कुछ शैतान प्रवृति की टीचर अपने असामाजिक हरकतों से बाज नहीं आती !
एक लड़की स्कूल यूनिफार्म में नहीं आई, उसकी लेडी टीचर ने उसे लड़कों के बी आठ रूम
में खड़े रहने का आदेश दे दिया ! लड़की की मम्मी ने लिख कर भी दिया था की “यूनिफार्म
गीला रहने से लड़की यूनिफार्म नहीं पहन पायी” ! क्या ऐसे जल्लाद टीचरको
उसी की भाषा में सजा नहीं मिलनी चाहिए !

राहुल अगर सच्चे मन से कांग्रेस से वंशवाद मिटाना चाहता है तो सबसे पहले उस की मम्मी और
उसे अध्यक्ष और उपाध्यक्ष की कुर्सी त्यागनी पड़ेगी ! वैसे भी कांग्रेस. में एक से बढ़कर एक दिमागधारी
हैं, सोनिया गांधी और राहुल से बढ़कर ! जिस दिन से राहुल गांधी उपाध्यक्ष बना कांग्रेस की नौका भंवर
में फसने लगी ! राहुल गांधी अभी हाल ही में अमेरिका केलिफोर्निया यूनिवर्सिटी में भाषण देने गया था,
भगवान् जाने राहुल ने वहां विद्यार्थियों के आगे क्या बोला होगा और विद्यार्थियों की समझ में क्या आया होगा !

मैंने भी सोचा है एक आश्रम खोल दूँ,
सोचो मत आश्रम खोल ही दो, तुमड़ी बजाने परिवार वाले हैं ही,
जमीन किसानों की जरा ज़रा करके हवन यज्ञ के नाम
पर हथियाते रहो, चेले चांटी अपने आप जुड़ने लगेगें ! न हींग लगे न फिटकरी
रंग भी चोखा निकलेगा ! दो चार श्लोक गीता के रट लो, रामायण के चौपाय याद
करने पड़ेंगे ! हाँ अगर पुराण और शिव पुराण पर भी नजर जैम गयी तो
समझलो पक्के बाबा बन जाओगे !
खूब जमेगी जब मिलेंगे दो तुमड़ी वाले ! जयराम जी की !

ये दोगलापन, ये दुगली सोच, लेखकों पत्रकारों
को कहीं का नहीं रखेगी, न घर का न घाट का !

बेटे जवाहर, आशीर्वाद बोलना होगा ! रोज नया कबूतर ले आते हो उड़ाने को,
और कमाल कर देते हो बिना पंख के कबूतर ही उड़ा दिया करते हो ! आधुनिक
शिक्षा पढ़ती है, शिक्षक बोलता है, सवाल करो, अगर शिक्षक को जबाब नहीं आया तो
गाल पर दो तमाचे, शरारती और पिछली लाईन वालों को एक मजाक उड़ाने का बहाना
मिल जाता है ! बेटे, बड़ी मेहनत की होगी लेख की सामग्री जुटाने में, कही पुराने जमाने की
सोच रखने वाले अध्यापकों
की क्लासों को छिप छिप कर झाँकने की कोशिश की होगी ! कहने का सार की बेटे
जवाहर लाल की पीठ थप थपाने पड़ेगी, व्यंगात्मक पर शिक्षाप्रद लेख !
चलिए अब अगली पंक्तियों में ! बाकी अगले भाग में !

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1 प्रतिक्रिया

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harirawat के द्वारा
September 12, 2017

केवल और केवल एक हल्की सी प्रतिक्रया !


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