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प्रकृति का संदेश, मेरे पोते की पसंद

Posted On: 19 Sep, 2017 कविता में

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sky

पर्वत कहता शीश उठाकर, तुम भी ऊँचे उठ जाओ,
सागर कहता है लहराकर, मन में गहराई लाओ।

समझ रहे हो क्या कहती है, उठ-उठ गिर-गिर तरल तरंग,
भर लो, भर लो अपने मन में, मीठी-मीठी मृदुल उमंग।

पृथ्वी कहती धैर्य न छोड़ो, कितना ही हो सिर पर भार,
नभ कहता है फैलो इतना, ढक लो तुम सारा संसार।

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