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स्नेह छलकता है दिल में

Posted On: 25 Nov, 2017 में

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स्नेह छलकता है दिल से, अंजुली में भरलो,
वात्सल्य बांटने वालों को स्नेह का उपहार दो !
प्रेम की दरिया दिल में, दिल दिलों को जोड़ लो,
स्नेह प्यार का उपहास हो, उस राह को छोड़ दो !
ये कुदरत का उपहार है, इसे संभाल लो,
वात्सल्य बांटने वालों को वात्सल्य का उपहार दो !
ये सुन्दर फूल पत्तिया, ख़ूशबू बिखराती हुई,
कलकल स्वरों में बहती सरिता, गीत जाती हुई,
पर्वतों से गिरते झरनों की झमझम झांकलों,
वात्सल्य बांटने वालों को, वात्सल्य का उपहार दो !

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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Shobha के द्वारा
November 25, 2017

श्री रावत जी सुंदर आपके हृदय के वात्सल्य को छलकाती भाव प्रधान रचना

    harirawat के द्वारा
    November 26, 2017

    शोभाजी नमस्कार ! आपकी टिप्पणी मेरे लिए टॉनिक का काम करती है और हौसला बुलंद होने से एक नया विचार जहन में उतर आता है ! दिल से धन्यवाद करता हूँ !


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